Ye Sab Sach Hai…Kumar Vishwas Latest 2016 #KVMusical

0

Poem Written and Composed by Kumar Vishwas
“तड़पन, पीर, उदासी, आँसू
बेचैनी, उपवास, अमावस
अजब प्रीत का मौसम मन में पतझर है
नयनों में पावस
इस अलमस्त जुगलबंदी से बाहर
कुछ भी प्रीत नहीं है
ये सब सच है
गीत नहीं है
लोग मिले कितने अनगाये
कितने उलझ-उलझ सुलझाये
कितनी बार डराने पहुँचे
आँखों तक कुछ काले साये
जो इन का युगबोध न समझे
साथी होगा मीत नहीं है
ये सब सच है गीत नहीं है…”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here